रतन खत्री: 'मटका किंग' और सट्टा मटका कैसे शुरू हुआ
अपडेट: 2026-10-22
सट्टा मटका का नाम आते ही सबसे पहले रतन खत्री याद आते हैं। कल्याणजी भगत के साथ उन्होंने 1960 के दशक में मुंबई की मिलों के मज़दूरों के इस खेल को पूरे देश का नंबर गेम बना दिया। यहाँ वही बातें हैं जिन पर भरोसेमंद स्रोत सहमत हैं।
एक नज़र में
| जन्म | लगभग 1932, कराची (तब ब्रिटिश भारत), सिंधी परिवार |
|---|---|
| मुंबई आए | 1947, बँटवारे के समय, किशोर उम्र में |
| पहचान | 'रतन मटका' – मेन बाज़ार से जुड़ा मटका नेटवर्क |
| साथ काम किया | कल्याणजी भगत (वर्ली / कल्याण मटका के संस्थापक) |
| जेल | इमरजेंसी (1975–77) में लगभग 19 महीने |
| निधन | 9 मई 2020, मुंबई, 88 वर्ष की उम्र में |
सट्टा मटका कैसे शुरू हुआ
आज़ादी से पहले बंबई में लोग न्यूयॉर्क कॉटन एक्सचेंज से टेलीप्रिंटर पर आने वाले कपास के खुलने और बंद होने के भाव पर दांव लगाते थे। इसे आंकड़ा जुगार कहा जाता था। लगभग 1961 में ये भाव आना बंद हो गए, तो नंबर निकालने का नया तरीका चाहिए था।
तरीका बना मटका – मिट्टी का घड़ा। 0 से 9 लिखी पर्चियाँ या ताश के पत्ते घड़े से निकाले जाते और उन्हीं से रिजल्ट बनता। इसी से नाम पड़ा सट्टा मटका।
कल्याणजी भगत और कल्याण मटका
कच्छ के व्यापारी कल्याणजी भगत ने 1962 में वर्ली मटका शुरू किया। यह रोज़ चलता था और बाद में कल्याण के नाम से मशहूर हुआ – आज भी सबसे ज़्यादा देखा जाने वाला मार्केट। आज का कल्याण रिजल्ट और कल्याण जोड़ी चार्ट देखें।
रतन खत्री का रतन मटका
रतन खत्री ने पहले कल्याणजी भगत के साथ काम किया और फिर 1960 के दशक की शुरुआत में (स्रोत 1962 या 1964 बताते हैं) अपना नेटवर्क शुरू किया। उनका खेल न्यू वर्ली या रतन मटका कहलाता था, सोमवार से शुक्रवार चलता था और आज के मेन बाज़ार से जुड़ा माना जाता है। लोगों के सामने घड़े से तीन पत्ते निकालने का तरीका उन्हीं से जोड़ा जाता है, जिससे लोगों को रिजल्ट ईमानदार लगा।
1970 के दशक तक यह कारोबार पूरे भारत में फैल गया और रोज़ करोड़ों रुपये लगते थे। इमरजेंसी (1975–77) में खत्री लगभग 19 महीने जेल में रहे। 1990 के दशक में मुंबई पुलिस की कार्रवाई के बाद बुकी शहर से बाहर चले गए और खत्री इस काम से हट गए। 9 मई 2020 को 88 वर्ष की उम्र में मुंबई में उनका निधन हुआ।
फ़िल्मों में
हिंदी फ़िल्म धर्मात्मा (1975) उनके जीवन से प्रेरित मानी जाती है। 2024 की तेलुगु फ़िल्म मटका और वेब सीरीज़ मटका किंग भी उसी दौर पर आधारित हैं।
क्या सट्टा मटका कानूनी है?
नहीं। सार्वजनिक जुआ अधिनियम 1867 और राज्यों के जुआ कानूनों के तहत भारत के ज़्यादातर हिस्सों में सट्टा मटका पर दांव लगाना गैरकानूनी है। MatkaPulse सिर्फ़ जानकारी के लिए रिजल्ट और रिकॉर्ड दिखाता है। हम दांव नहीं लेते, टिप्स या 'फिक्स' नंबर नहीं बेचते।
सवाल-जवाब
रतन खत्री कौन थे?
कराची से 1947 में मुंबई आए सिंधी व्यापारी, जिन्होंने 1960 के दशक से रतन मटका चलाया – भारत के सबसे बड़े मटका नेटवर्क में से एक। उन्हें 'मटका किंग' कहा जाता है।
कल्याण मटका किसने शुरू किया?
कल्याणजी भगत ने 1962 में वर्ली मटका शुरू किया, जो कल्याण मटका के नाम से जाना गया।
रतन खत्री का निधन कब हुआ?
9 मई 2020 को मुंबई में, 88 वर्ष की उम्र में।
इसे मटका क्यों कहते हैं?
क्योंकि नंबर मटके (मिट्टी के घड़े) से निकाले जाते थे।