कल्याणजी भगत: कल्याण मटका के पीछे का आदमी
अपडेट: 2026-10-24
कल्याणजी भगत ने 1962 में वर्ली मटका शुरू किया – वह रोज़ का खेल जिसका नाम आज कल्याण के रूप में ज़िंदा है, सबसे ज़्यादा देखा जाने वाला मटका मार्केट। यहाँ वे तथ्य हैं जिन पर प्रकाशित स्रोत सहमत हैं।
एक नज़र में
| जन्म | कच्छ, गुजरात के किसान परिवार में (पारिवारिक नाम गाला) |
|---|---|
| 'भगत' नाम | 'भक्त' से – बताया जाता है कि कच्छ के राजा ने परिवार की भक्ति के लिए यह उपाधि दी |
| बंबई आए | 1941 में – ठेले पर मसाले बेचे, बाद में वर्ली में किराने की दुकान चलाई |
| वर्ली मटका शुरू किया | 1962, वर्ली में अपनी इमारत के अहाते से |
| कैसे चलता था | हफ़्ते के सातों दिन |
| निधन | 1990 के दशक की शुरुआत में; बेटे सुरेश भगत ने कारोबार संभाला |
कपास के भाव से मटका तक
मटके से पहले बंबई के मिल मज़दूर न्यूयॉर्क कपास बाज़ार से आने वाले कपास के खुलने और बंद होने के भाव पर दांव लगाते थे। कल्याणजी भगत ने वर्ली की अपनी किराने की दुकान पर ऐसे दांव लेना शुरू किया। 1960 के दशक की शुरुआत में कपास के भाव मिलना बंद हुए तो नंबर मिट्टी के घड़े – मटके – से निकाले जाने लगे, और 1962 में उनका खेल वर्ली मटका बन गया।
कल्याणजी भगत और रतन खत्री
रतन खत्री, जिन्हें बाद में 'मटका किंग' कहा गया, इसी दुनिया में थे और 1964 में उन्होंने अपना अलग न्यू वर्ली खेल शुरू किया, जो सोमवार से शुक्रवार चलता था जबकि भगत का खेल पूरे हफ़्ते। स्रोत इन्हें अलग-अलग कारोबार बताते हैं। रतन खत्री की कहानी हमारे रतन खत्री गाइड में पढ़ें।
आज का कल्याण
कल्याण आज भी सबसे बड़ा मटका मार्केट है: दोपहर में ओपन और लगभग दो घंटे बाद क्लोज़, सोमवार से शनिवार। आज का कल्याण रिजल्ट, इसकी टाइमिंग और 2012 तक के रिकॉर्ड वाला पूरा कल्याण चार्ट देखें।
मटका किंग सीरीज़
2026 में सीरीज़ मटका किंग (Amazon Prime Video, 17 अप्रैल 2026 को रिलीज़) ने इस दौर को परदे पर दिखाया। खबरों के मुताबिक, कल्याणजी भगत की पोती रिलीज़ से पहले अदालत गईं – उनका कहना था कि यह बिना अनुमति उनके दादा के जीवन पर आधारित है; अदालत ने रिलीज़ नहीं रोकी।
यह पेज सिर्फ़ जानकारी के लिए इतिहास है। भारत के ज़्यादातर हिस्सों में मटका पर दांव लगाना गैरकानूनी है। MatkaPulse दांव नहीं लेता, टिप्स नहीं बेचता। 18+।
सवाल-जवाब
कल्याणजी भगत कौन थे?
कच्छ, गुजरात के एक व्यक्ति जो 1941 में बंबई आए और 1962 में वर्ली मटका शुरू किया – जिसे आज कल्याण मटका कहा जाता है।
कल्याण मटका कब शुरू हुआ?
कल्याणजी भगत का वर्ली मटका 1962 में शुरू हुआ।
कल्याण मटका किसने शुरू किया – रतन खत्री या कल्याणजी भगत?
कल्याणजी भगत ने 1962 में वर्ली (कल्याण) मटका शुरू किया। रतन खत्री ने 1964 में अपना अलग न्यू वर्ली खेल शुरू किया।
कल्याणजी भगत का निधन कब हुआ?
1990 के दशक की शुरुआत में; फिर उनके बेटे सुरेश भगत ने कारोबार चलाया।